जानलेवा बनी खतरे में पड़ी जमापूंजी

0
54

सहारा ने बनाया बेसहारा… एजेंट और निवेशकों में भुगतान को ले संशय, बोकारो में एक और मौत

विजय कुमार झा
बोकारो : अपनी उम्र भर की गाढ़ी कमाई भविष्य के लिए संजोकर रखने वाले हजारों-हजार लोगों की उम्मीदें आज दम तोड़ती नजर आ रही हैं। जिस जमापूंजी को उन्होंने अपने आने वाले कल के लिए हिफाजत में समझकर सहारा इंडिया में निवेश किया था, वह खतरे में है। लोगों को उनके पैसे मिलेंगे भी या नहीं, यह अपने-आप में एक बड़ा सवाल बन गया है।

वैसे तो देशभर में सहारा इंडिया में निवेश करनेवाले लोगों की हालत खस्ता है, लेकिन बोकारो में जिस कदर आए दिन खतरे में पड़ी इस जमापूंजी के कारण मौत के मामले सामने आ रहे हैं, वह वास्तव में चिंतनीय है। पिछले दिनों जिले के बेरमो से सहारा के एक और एजेंट की मौत का मामला सामने आया। सहारा इंडिया कंपनी के अभिकर्ता मकोली नीचे धौड़ा निवासी राजकुमार चौहान (40) का ब्रेन हेमरेज होने से रांची स्थित मेडिका अस्पताल निधन हो गया। राजकुमार की बहन फूल कुमारी देवी सहित अन्य परिजनों का दावा है कि राजकुमार से लोग फोन करके पैसा दिलाने की मांग करते थे। कुछ लोग घर पर भी आकर पैसों की मांग करने लगे थे, इसलिए उन्हें ज्यादा टेंशन हो गया था। अपने घर की बहन, मां, भाई, पिताजी सहित उनके ससुर, साला सभी का पैसा डूबा हुआ था। सिर्फ राजकुमार की बहन का 9 लाख रुपए डूबा हुआ है। घर के लोग परेशान नहीं करते थे, लेकिन बाहर के लोग कहते थे कि पैसा डूबा है तो आप व्यवस्था करके दीजिए, जहां जाते थे, वहां लोग उन्हें परेशान करते थे। कहा, लगभग एक वर्ष से पुराना काम का कमीशन तक नहीं मिल रहा है। राजकुमार पूरी तरह टूट चुके थे। वह अपने पीछे दो पुत्री तथा दो पुत्र छोड़ गए हैं।

पहले एजेंट कर चुके हैं आत्महत्या
कुछ माह पूर्व खलारी के एक एजेंट ने आत्महत्या कर ली थी। इसी तरह, बोकारो जिले में पिछले वर्ष 14 नवंबर को सहारा इंडिया द्वारा भुगतान नहीं होने से परेशान सहारा इंडिया के अभिकर्ता आईईएल थाना क्षेत्र गवर्नमेंट कॉलोनी लाल फ्लैट समीप निवासी गणेश नोनिया (45) नामक एजेंट ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। वह 25 लाख रुपए ग्राहकों की देनदारी का भुगतान नहीं होने से अवसाद में थे। गणेश अपने पीछे तीन बेटी और एक 12 साल का बेटा सहित पत्नी को छोड़ गए थे।

अकेले बेरमो में 200 करोड़ बकाया
बकाए रकम की बात करें तो अकेले बेरमो क्षेत्र में ही लगभग 200 करोड़ रुपए की जमापूंजी का भुगतान बकाया है। इसमें सिर्फ फुसरो इलाके से लगभग 80 करोड़ रुपए की लोगों की देनदारी बाकी है। शेष पैसे गोमिया सेक्टर व अन्य छोटे छोटे फ्रेंचाइजी के हैं। सहारा इंडिया द्वारा पैसे का भुगतान लगभग बंद कर दिया गया है।

बिहार-झारखंड के कई जिलों का नियंत्रण बोकारो से
वरीय अभिकर्ताओं के अनुसार सहारा इंडिया के बोकारो जोन से बोकारो जिला सहित बिहार-झारखंड के कई जिलों का नियंत्रण होता है। इनमें भागलपुर, पूर्णिया, धनबाद, देवघर, गोमिया तथा बगोदर शामिल हैं। सीनियर एजेंटो ने देनदारी का भुगतान न होने के पीछे सहारा के क्षेत्रीय प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि रीजनल आॅफिस के अधिकारी व कर्मी अपनी नौकरी बचाने के चक्कर में मुख्यालय में पैसा भुगतान का डिमांड जोरदार ढंग से नहीं कर पा रहे हैं। इस कारण भुगतान नहीं हो रहा है। बता दें कि आए दिन सेक्टर-4 स्थित बोकारो जोन के कार्यालय में इसे लेकर हंगामे भी होते रहे हैं।

इधर, झारखंड में ढ़ाई लाख से भी ज्यादा लोगों के 3 हजार करोड़ रुपए संकट में

रांची : सहारा इंडिया की विभिन्न योजनाओं में झारखंड के तकरीबन ढ़ाई लाख से भी ज्यादा लोगों के लगभग 3 हजार करोड़ रुपये फंसे हैं। जमा योजनाओं की पॉलिसी मैच्योर्ड होने के बाद भी लगभग दो वर्ष से भुगतान पूरी तरह बंद है। राज्य के अलग-अलग इलाकों में स्थित सहारा के दफ्तरों में हर रोज बड़ी तादाद में पॉलिसी की राशि के भुगतान की मांग लेकर पहुंच रहे हैं, लेकिन उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ रहा है। रांची, हजारीबाग, रामगढ़, बेरमो, बोकारो, धनबाद, जमशेदपुर सहित कई शहरों में निवेश करने वाले लोगों ने सहारा के दफ्तरों के बाहर प्रदर्शन भी किया है, लेकिन इन शाखाओं के प्रबंधकों और कर्मियों के पास कोई जवाब नहीं है। कंपनी के लिए काम करने वाले 60 हजार से भी ज्यादा कर्मी हर रोज हो रहे हंगामों से परेशान हैं। निवेशकों का कहना है मैच्योरिटी की राशि का भुगतान न होने से किसी का इलाज के अभाव में निधन हो गया तो किसी के बच्चों की पढ़ाई से लेकर शादी तक रुक गई। बेरमो के रामदास साव के मुताबिक, उन्होंने अपने जीवन की पूरी कमाई 20 लाख रुपये सहारा इंडिया में जमा किए, लेकिन उन्हें एमआईएस तक का भुगतान नहीं किया जा रहा। हजारीबाग के शिवपुरी निवासी संतोष कुमार के एक लाख रुपये फंसे हैं और वह दो साल से परेशान हैं। बेरमो के बबलू गुप्ता और उनकी पत्नी राजकुमारी भारती का कहना है कि पैसे न मिलने की वजह से उन्हें अपनी बेटी का विवाह स्थगित करना पड़ा। इसी तरह प्रदीप कुमार भगत ने भी 21 लाख रुपये जमा किए हैं, लेकिन उन्हें ब्याज तक की रकम नहीं दी जा रही है।

भुखमरी की कगार पर हैं कर्मी, 12 लाख कार्यकर्ता आत्महत्या को विवश
कंपनी के कमीशन एजेंट और कर्मचारियों का कहना है कि जमाकर्ताओं का भुगतान नहीं होने से हालत बहुत खराब है। वे भुखमरी की कगार पर हैं। खुद के घर में खाने-पानी के लाले पड़े हैं, ऊपर से जमाकर्ता उनसे अपना पैसा मांग रहे हैं। जबकि, सहारा कर्मियों को पिछले कई सालों से वेतन ही नहीं मिला है। भुगतान नहीं होने के कारण आये दिन सहारा कर्मचारियों और एजेंट मारे जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार पूरे देश में करीब 12 लाख कार्यकर्ता और 13 करोड़ जमाकर्ता प्रभावित और बेरोजगार हैं। यह पूरे देश की आबादी का बड़ा हिस्सा है। सहारा इंडिया परिवार के मामले का निस्तारण नहीं हाने से यह सभी बेरोजगार, प्रभावित, परेशान और भुखमरी की कगार पर हैं। इसकी वजह से हजारों लोग आत्महत्या कर चुके हैं। इन्हें परिवार का भरण-पोषण करने का कोई रास्ता नहीं दिख रहा, इसलिए आत्महत्या करने को मजबूर हैं। ये अलग बात है कि तनाव चरम सीमा पर है, परंतु जिंदगी से मुंह मोड़ना भी सही नहीं ठहराया जा सकता।


कंपनी के अधिकारियों पर चल रहे कई मुकदमे, 10 साल से जारी है कानूनी लड़ाई
प्राप्त जानकारी के अनुसार जमाकर्ताओं द्वारा मुकदमा दर्ज कराए जाने के कई मामलों में सहारा कर्मचारियों जमानत पर हैं। सहारा के कई वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों पर धोखाधड़ी सहित कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज है। पिछले दिनों कानपुर के काकादेव थाना क्षेत्र में सहारा प्रमुख सुब्रत राय सहित कई शीर्ष डायरेक्टर पर मुकदमे दर्ज कराए गए हैं। कुछ महीने पहले सहारा के जोनल कार्यालय काकादेव में एजेंटों ने जमा कर्ताओं का भुगतान नहीं होने पर दफ्तर में ताला डाल दिया था, जिसके चलते रात भर कर्मचारी कार्यालय में बंद रहे थे। खबरों के अनुसार सहारा इंडिया की पिछले दस साल से कोर्ट में कानूनी लड़ाई चल रही है। इस वजह से देश में लाखों लोग बेरोजगार हो गए हैं।

फैक्ट्स… 1978 में हुई थी सहारा इंडिया की स्थापना

सहारा इंडिया परिवार हमारे भारत देश की बहु-व्यापारिक अर्थात कई व्यापार में अपना पैसा लगाने वाली कंपनी है। वित्तीय सेवाओं, फाइनेंस हाउसिंग फाइनेंस, म्यूचुअल फंड, जीवन बीमा, फिल्म निर्माण, खेल, पर्यटन, नगर विकास आदि क्षेत्रों में फैला हुआ है। सहारा इंडिया परिवार का हेड-क्वार्टर अर्थात मुख्यालय लखनऊ, उत्तर प्रदेश में स्थित है। इसके संस्थापक एवं मालिक सुब्रत रॉय ने 1978 में इसकी स्थापना की थी। आज सहारा इंडिया परिवार में लगभग 1.2 मिलियन वेतनभोगी कर्मचारी, सलाहकार, फील्ड वर्कर, एजेंट और व्यावसायिक सहयोगी शामिल हैं, लेकिन सभी बदहाल हैं।

– Varnan Live Report.

Previous articleबोकारो के संतोष बने मिशन मोदी अगेन के झारखंड प्रदेश मंत्री, कहा- 2024 में फिर कामयाब होगा मिशन
Next articleमंदी की ओर बढ़ती दुनिया…
मिथिला वर्णन (Mithila Varnan) : स्वच्छ पत्रकारिता, स्वस्थ पत्रकारिता'! DAVP मान्यता-प्राप्त झारखंड-बिहार का अतिलोकप्रिय हिन्दी साप्ताहिक अब न्यूज-पोर्टल के अवतार में भी नियमित अपडेट रहने के लिये जुड़े रहें हमारे साथ- facebook.com/mithilavarnan twitter.com/mithila_varnan ---------------------------------------------------- 'स्वच्छ पत्रकारिता, स्वस्थ पत्रकारिता', यही है हमारा लक्ष्य। इसी उद्देश्य को लेकर वर्ष 1985 में मिथिलांचल के गर्भ-गृह जगतजननी माँ जानकी की जन्मभूमि सीतामढ़ी की कोख से निकला था आपका यह लोकप्रिय हिन्दी साप्ताहिक 'मिथिला वर्णन'। उन दिनों अखण्ड बिहार में इस अख़बार ने साप्ताहिक के रूप में अपनी एक अलग पहचान बनायी। कालान्तर में बिहार का विभाजन हुआ। रत्नगर्भा धरती झारखण्ड को अलग पहचान मिली। पर 'मिथिला वर्णन' न सिर्फ मिथिला और बिहार का, बल्कि झारखण्ड का भी प्रतिनिधित्व करता रहा। समय बदला, परिस्थितियां बदलीं। अन्तर सिर्फ यह हुआ कि हमारा मुख्यालय बदल गया। लेकिन एशिया महादेश में सबसे बड़े इस्पात कारखाने को अपनी गोद में समेटे झारखण्ड की धरती बोकारो इस्पात नगर से प्रकाशित यह साप्ताहिक शहर और गाँव के लोगों की आवाज बनकर आज भी 'स्वच्छ और स्वस्थ पत्रकारिता' के क्षेत्र में निरन्तर गतिशील है। संचार क्रांति के इस युग में आज यह अख़बार 'फेसबुक', 'ट्वीटर' और उसके बाद 'वेबसाइट' पर भी उपलब्ध है। हमें उम्मीद है कि अपने सुधी पाठकों और शुभेच्छुओं के सहयोग से यह अखबार आगे और भी प्रगतिशील होता रहेगा। एकबार हम अपने सहयोगियों के प्रति पुनः आभार प्रकट करते हैं, जिन्होंने हमें इस मुकाम तक पहुँचाने में अपना विशेष योगदान दिया है।

Leave a Reply