… और हेमंत बने झारखंड के सरताज

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विशेष संवाददाता
रांची :
झारखंड के नये मुख्यमंत्री के रूप में हेमंत सोरेन की ताजपोशी हो गई और इसके साथ ही वह सूबे के सरताज बन गए। हेमंत ने राज्य के11वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के साथ सत्ता संभाल ली। राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलायी। हेमंत के साथ ही कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष व लोहरदगा से विधायक रामेश्वर उरांव, पाकुड़ से विधायक व कांग्रेस विधायक दल के नेता आलमगीर आलम और चतरा से राजद विधायक सत्यानंद भोक्ता ने भी मंत्री पद की शपथ ली। शपथ ग्रहण समारोह मोरहाबादी मैदान में हुआ। इस ऐतिहासिक पल के राहुल गांधी व ममता बनर्जी सहित कई बड़े नेता गवाह बने। समारोह में हेमंत सोेरेन के पिता शिबू सोरेन, माता रूपी सोरेन व पत्नी कल्पना सोरेन भी मौजूद थीं। समारोह में पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास,बाबूलाल मरांडी व मधु कोड़ा भी उपस्थित थे। हेमंत सहित सभी बड़े नेताओं के समारोह स्थल पहुंचने पर उनका झारखंडी संस्कृति के अनुरूप स्वागत किया गया।

पिता का आशीर्वाद ले खुद ड्राइव कर पहुंचे
शपथ ग्रहण से पहले हेमंत ने अपने पिता झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन से आर्शीवाद लिया। अपने आवास से हेमंत सोरेन खुद कार ड्राइव कर शिबू सोरेन के आवास पहुंचे थे। इसके बाद वहां से समारोह स्थल के लिए रवाना हुए। हेमंत 1. 45 बजे मंच पर पहुंचे। वहां उन्होंने अतिथियों का स्वागत किया। साथ ही मोरहाबादी मैदान में मौजूद लोगों का हाथ हिलाकर अभिवादन स्वीकार किया। समारोह के दौरान पूरा मोरहाबादी परिसर ढोल नगाड़ों की थाप पर गूंजता रहा। हेमंत ने जैसे ही शपथ ली कार्यकर्ताओं ने उत्साहित होकर गगनभेदी नारे लगाये।

झारखंडी शैली में सजा रहा मैदान
शपथ ग्रहण समारोह के लिए मोरहाबादी मैदान को झारखंडी शैली में सजाया गया था। झारखंड की कोहबर कला के अलावा कला संस्कृति को प्रमुखता से दर्शाया गया था। शपथ ग्रहण समारोह को लेकर पूरे राज्य में लोगों का उत्साह चरम पर रहा। मोरहाबादी स्थित कार्यक्रम स्थल पर लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। सभी इस समारोह के साक्षी बने।

प्रोजेक्ट भवन में अधिकारियों व कर्मियों ने किया स्वागत
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शपथ लेने के बाद प्रोजेक्ट भवन मंत्रालय पहुंच कर पदभार ग्रहण किया। इससे पूर्व श्री सोरेन मुख्यमंत्री कार्यालय को नमन कर सीएम की कुर्सी पर आसीन हुए। मुख्यमंत्री से मंत्रिमंडल के सदस्य मंत्री आलमगीर आलम, रामेश्वर उरांव एवं सत्यानंद भोक्ता ने मुलाकात की। झारखंड मंत्रालय पहुंचने पर मुख्यमंत्री श्री सोरेन का मुख्य सचिव डॉ डीके तिवारी व कैबिनेट सचिव अजय कुमार सिंह ने पुस्तक भेंट कर अभिनंदन किया। इस मौके पर मंत्रालय में कार्यरत अधिकारी, पदाधिकारी व कर्मचारियों ने भी मुख्यमंत्र का गर्मजोशी से स्वागत किया।

दूसरी बार हेमंत को मिली कमान
हेमंत सोरेन ने दूसरी बार मुख्यमंत्री बन इस प्रदेश की कमान संभाली है। इससे पहले वर्ष 2013 के जुलाई महीने में उन्होंने सीएम पद की शपथ ली थी। 2013 में झामुमो, कांग्रेस और राजद ने साथ मिलकर सरकार बनायी थी। हालांकि, यह सरकार 01 साल 05 महीने व 15 दिन तक ही चली थी। इस बार के विधानसभा चुनाव में झामुमो, कांग्रेस और आरजेडी के गठबंधन ने 81 सीटों वाली विधानसभा में 47 सीटों पर जीत दर्ज की है। इसमें झामुमो को 30, कांग्रेस को 16 और राजद को 01 सीट पर जीत हासिल हुई। वहीं झाविमो के तीन , एनसीपी और सीपीआइ एमएएल के 1-1 विधायकों ने जीत हासिल की और गठबंधन को ही अपना समर्थन दिया है।

सभी को साथ ले राज्य को देंगे नई ऊंचाई : सोरेन
हेमंत सोरेन ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद झारखंड की सवा तीन करोड़ जनता के प्रति आभार जताया है। उन्होंने कहा कि हम सभी को साथ चल कर झारखंड को नित नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है। हमारी सरकार सभी वर्गों और समुदायों के लोगों के सर्वांगीण विकास के लिए काम करेगी। राज्य में अमन, चैन, शांति और समृद्धि का नया दौर शुरू होगा। उन्होंने कहा कि आपकी आकांक्षाओं और सपनों को पूरा करने की दिशा में नई सरकार सदैव कार्य करेगी। हेमंत ने शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए लोगों के प्रति आभार जताया और कहा कि आप इस समारोह के साक्षी बने यह राज्य के लिए बहुत ही गौरवशाली क्षण रहा।

पहली ही बैठक में लिए कई बड़े फैसले
हेमंत सरकार ने कैबिनेट की पहली ही बैठक में कई अहम फैसले लेकर सूबे में चर्चा का माहौल गर्म कर दिया। कैबिनेट ने राज्य में सीएनटी, एसपीटी एक्ट तथा पत्थलगड़ी को लेकर हुए मुकदमे वापस लेने का निर्णय लिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य में ऐसे 10 हजार लोग हैं, जिनके विरूद्ध सीएनटी, एसपीटी और पत्थलगड़ी विवाद को लेकर विभिन्न थानों में केस दर्ज हैं। कैबिनेट की बैठक में नौ प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई। कैबिनेट की बैठक में सभी जिले के उपायुक्तों को प्रखंड और पंचायतों में शिविर लगाकर आगनबाड़ी सेविका, पारा शिक्षकों, सहायिका और विभिन्न पेंशनभोगियों के बकाये राशि का भुगतान करने का फैसला लिया गया। सभी उपायुक्तों और नगर आयुक्तों को संबंधित जिलों में गरीबों को कंबल और ऊनी टोपी के वितरण का निर्णय लिया गया तथा झारखंड के प्रतीक चिह्न में संशोधन करते हुए इसे राज्य की संस्कृति और परंपरा के अनुसार करने के लिए प्रस्ताव आमंत्रित करने का फैसला लिया गया।

– Varnan Live Report.

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