भूख और बेकारी से संकट में आदिम जनजाति के 441 लोग

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विडंबना : मनातू में 6 लोग टीबी के शिकार, न राशनकार्ड और न ही कोई सरकारी सहायता

नारायण विश्वकर्मा
पलामू : पलामू के मनातू प्रखंड में पुरुषों को टीबी और महिलाओं को एनेमिया रोग ने जकड़ रखा है। ये सभी परहिया आदिम जनजाति समुदाय के हैं और सभी कुपोषण की त्रासदी झेलने को अभिशप्त हैं। मनातू प्रखंड की डुमरी पंचायत के दलदलिया, सिकनी और केदला गांव के 6 लोग लंबे समय से कुपोषण के शिकार हैं। लेकिन, अभी तक प्रखंड से लेकर जिला प्रशासन की इन पर नजरें इनायत नहीं हुई है। अपने इलाज के लिए मरीजों ने पिछले 01 अप्रैल को पलामू मेडिकल कॉलेज अस्पताल प्रबंधन से एंबुलेंस की मांग की, लेकिन नहीं मिली। हालात बिगड़ने पर गांव वालों ने टीबी मरीजों को मोटरसाइकिल से 70 किलोमीटर दूर किसी तरह अस्पताल पहुंचा दिया। पीड़ित सकेंद्र परहिया सहित लोगों का वहां समुचित इलाज नहीं हुआ। 20-25 दिन पूर्व उन्हें मुंह से खून आने लगा था। तब सकेंद्र परहिया पंचायत के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में अपने इलाज के लिए पहुंचा, लेकिन वहां से उन्हें दुत्कार कर भगा दिया गया।
इसके बाद गांव के लोगों के सहयोग द्वारा 6 टीबी के मरीजों को मेडिकल कॉलेज अस्पताल प्रबंधन ने दूसरे दिन सभी को घर जाने के लिए कह दिया। सभी दिन भर में हांफते-कराहते 70 किलोमीटर दूरी तय कर अपने गांव पहुंचे।
जानकारी मिलने पर एनसीडीएचआर (एनजीओ) के राज्य समन्वयक मिथिलेश कुमार ने गांव पहुंच कर सबका हाल जाना। तब पता चला कि परहिया समुदाय के घर में कुपोषण का बसेरा है। भूख और बेकारी से ये लोग जिंदगी की जंग हार चुके हैं। उन्होंने बताया कि मनातू प्रखंड में आदिम जनजातियों की संख्या 441 है। इनमें 150 परिवारों के पास राशन कार्ड तक नहीं है। डाकिया योजना के तहत राज्य सरकार द्वारा मुहैया कराये जानेवाले 35 किलो चावल भी मिलना बंद है। कई कार्डधारियों को कई महीने से चावल नसीब नहीं हुआ है। भूख और बेकारी ने इन्हें मौत की चौखट पर लाकर खड़ा कर दिया है। अब देखना है कि इनके पास सरकार पहुंचती है या फिर यमराज।

– Varnan Live Report.

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