‘भगोड़े’ अफसरों के वेतन पर लटकी ‘तलवार’, Civil Surgeon समेत कई को शो-कॉज, समीक्षा बैठक में न आने पर हुई कार्रवाई
उपायुक्त ने चेताया- अब पारदर्शी न हुए काम, तो भ्रष्ट अफसरों की खैर नहीं
कार्यालय संवाददाता
बोकारो: जिले की पूर्व उपायुक्त विजया जाधव के कार्यकाल के दौरान हुए 500 करोड़ रुपये से अधिक के कथित DMFT (डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट) महाघोटाले ने पूरे राज्य में भूचाल ला दिया है। यह घोटाला अब सिर्फ फाइलों तक सीमित नहीं है, बल्कि सीधे राष्ट्रपति तक पहुंच चुका है और जनता की जुबान पर आ चुका है। सोमवार को नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने भी इस ‘महा-लूट’ पर सीबीआई जांच की मांग कर आग में घी डालने का काम किया है। लेकिन, अब इस ‘भ्रष्टाचार के खेल’ में एक नया मोड़ मंगलवार को दिखा। बोकारो के वर्तमान उपायुक्त अजय नाथ झा ने एक ऐसी ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की है, जिसने भ्रष्ट अफसरों की नींद उड़ा दी है। डीसी श्री झा ने घोटाले की खबरों के बीच वित्तीय वर्ष 2023-24 एवं 2024-25 में हुए सभी कार्यों के लिए राज्य द्वारा निर्धारित ऑडिट एजेंसी से रेगुलर ऑडिट कराने तथा उनका भौतिक सत्यापन किये जाने का सख्त निर्देश दिया है। साथ ही, भविष्य में किसी भी तरह की लापरवाही को रोकने के लिए भी कमर कस ली है। उन्होंने डीएमएफटी के कार्यों में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों को सख्त चेतावनी दी और एक एक्शन प्लान तैयार किया।
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आश्चर्य की बात तो यह है कि डीएमएफटी के कार्य एक तरफ इन दिनों जहां सुर्खियों में हैं, वहीं इस महत्वपूर्ण मामले को लेकर हुई समीक्षा बैठक में कई बड़े-बड़े अधिकारी गायब थे। बिना किसी सूचना के नदारत रहे इन अफसरों पर डीसी का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने पूछा कि जब डीएमएफटी जैसे गंभीर मुद्दे पर बैठक हो रही थी तो ये ‘बड़े लोग’ कहां थे? उन्होंने कार्यपालक अभियंता तेनुघाट डैम, सिविल सर्जन, कार्यपालक अभियंता जिला परिषद, कार्यपालक अभियंता आरईओ, कार्यपालक अभियंता एनआरईपी, कार्यपालक अभियंता पीएचईडी तेनुघाट और कई अन्य ‘भगोड़े’ अफसरों से 24 घंटे में जवाब मांगा है। डीसी ने एक और ‘धमाका’ करते हुए कहा है कि जब तक संतोषजनक जवाब नहीं मिलता, इन सभी का वेतन रोक दिया जाए!
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‘Operation Clean’! 500 करोड़ के ‘घपले’ पर सबसे बड़ा प्रहार
मंगलवार को डीसी श्री झा ने अपने कार्यालय में डीएमएफटी की समीक्षा बैठक बुलाई और उन्होंने सीधे-सीधे एजेंसियों और पीएमयू टीम से कहा कि अब ‘सब कुछ’ शीशे की तरह साफ होगा। वित्तीय वर्ष 2023-24 और 2024-25 में हुए कार्यों की समीक्षा करते हुए सभी एजेंसियों को अपने कार्यों में पूरी पारदर्शिता लाने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। उन्होंने सभी एजेंसियों को सिर्फ 48 घंटे का ‘अल्टीमेटम’ दिया है। इन एजेंसियों में तेनुघाट डैम प्रमंडल, सिविल सर्जन, जिला अभियंता, विद्युत प्रमंडल, भवन प्रमंडल, विशेष प्रमंडल, एनआरईपी, पीएचईडी, आरईओ शामिल हैं। डीसी ने आदेश दिया है कि ये सभी ‘समरी रिपोर्ट’ में हर काम का हिसाब दें— निविदा से लेकर काम की प्रगति तक। यह रिपोर्ट डीएमएफटी के पब्लिक पोर्टल पर लाइव होगी, ताकि जनता खुद देख सके कि उनके पैसे का क्या हुआ। उपायुक्त ने चेतावनी दी कि जो एजेंसी अगले 02 दिनों में रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराएगी, उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
डीसी की औचक जांच में अगर मिली गड़बड़ी, तो जाएगी नौकरी
बैठक में उपायुक्त ने अपर समाहर्ता मुमताज अंसारी को तुरंत एक टीम गठित करने का निर्देश दिया, जो सभी डीएमएफटी कार्यों का मौके पर जाकर भौतिक निरीक्षण करेगी। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि जो भी अधिकारी/कर्मी सिस्टम को हल्के में लेगा, उस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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DC ने चेतावनी दी है कि वे किसी भी वक्त किसी भी दफ्तर का ‘औचक निरीक्षण’ कर सकते हैं। अगर कोई भी फाइल या रजिस्टर एक हफ्ते से ‘गायब’ या अपडेट नहीं मिला, तो संबंधित अधिकारी की नौकरी पर तलवार लटक जाएगी। आज की बैठक में उप विकास आयुक्त शताब्दी मजूमदार, अपर समाहर्ता मुमताज अंसारी, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी रवि कुमार, जिला योजना पदाधिकारी राज शर्मा, सहायक जनसंपर्क पदाधिकारी अविनाश कुमार सिंह और अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
- Varnan Live Report.





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