Exclusive: ऐश पौंड में रत्ती भर जगह नहीं बची, प्रबंधन ने आनन-फानन में लिया ‘विस्फोटक’ फैसला
– कुमार संजय
बोकारो थर्मल: झारखंड के लाखों बिजली उपभोक्ताओं और विशाल औद्योगिक क्षेत्रों के लिए एक विनाशकारी और सनसनीखेज खबर सामने आई है! बोकारो थर्मल स्थित डीवीसी (DVC) के 500 मेगावाट वाले ‘ए’ पावर प्लांट की यूनिट को मंगलवार की देर रात्रि ठीक 11 बजे अचानक और मजबूरीवश ठप कर दिया गया है। यह विस्फोटक फैसला डीवीसी के उच्च अधिकारियों की एक आपातकालीन बैठक के बाद लिया गया, जिसने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है। प्लांट बंद करने के पीछे का कारण कोई सामान्य तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि एक अत्यंत गंभीर मजबूरी है: ऐश पौंड (राख जमा करने का तालाब) में रत्ती भर भी जगह नहीं बची है!
डीवीसी के एचओपी सुशील कुमार अरजरिया की अध्यक्षता में मंगलवार रात हुई बैठक में जीएम ऐश मैनेजमेंट सिस्टम राजेश विश्वास और अन्य अभियंताओं ने यह पीड़ादायक निर्णय लिया। जीएम राजेश विश्वास ने खुद स्वीकारा कि डीवीसी प्रबंधन के पास दूसरा कोई विकल्प नहीं बचा था, क्योंकि नूरी नगर स्थित डीवीसी के दोनों ऐश पौंड पूरी तरह से भरे हुए हैं और अब छाई (राख) का एक कण भी गिराने की जगह शेष नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि ऐश पौंड से छाई उठाव के प्रयास को भी बकाया वेतन मांग रहे 55 मजदूरों ने काम शुरू करने से रोक दिया।
यह 500 मेगावाट की यूनिट जब बंद की गई, उससे ठीक पहले 360 मेगावाट बिजली का उत्पादन कर रही थी। इसके ठप होते ही, डीवीसी के पावर सप्लाई वाले 7 कमांड जिलों – धनबाद, कोडरमा, गिरिडीह, हजारीबाग, रामगढ़, रांची और बोकारो – पर गंभीर ब्लैक आउट का संकट गहरा गया है। इन जिलों के उपभोक्ताओं को अब रोटेशन पर लंबी और अनिश्चित बिजली कटौती का सामना करना पड़ेगा, जबकि CCL समेत धनबाद और बोकारो जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में कल-कारखानों का संचालन बुरी तरह प्रभावित होगा, जिससे भारी आर्थिक नुकसान की प्रबल आशंका है और आम जनजीवन भी अस्त-व्यस्त हो जाएगा।
इस शटडाउन का सीधा और तत्काल असर लगभग 500 मजदूरों की रोजी-रोटी पर पड़ेगा, जो विभिन्न विभागों (जैसे सीएचपी, बॉयलर, टर्बाइन आदि) में कार्यरत हैं। पहले से ही, विगत साढ़े तीन माह से ऐश पौंड बंद होने के कारण इसमें कार्यरत 57 मजदूर काम से बैठ चुके हैं, जिससे उनके परिवारों को भारी कठिनाई झेलनी पड़ी है और अब बेरोजगारी का नया महासंकट आ खड़ा हुआ है। बोकारो थर्मल के दोनों ऐश पौंड पिछले चार माह से छाई से अटे पड़े हैं। विगत 15 जुलाई से ही छाई उठाव बेरमो हाईवा कोयलांचल एसोसिएशन एवं विस्थापितों के आंदोलन के कारण बंद था। 1 नवंबर को एसडीएम मुकेश मछुआ की अध्यक्षता में त्रिपक्षीय वार्ता हुई, आंदोलन भी समाप्त हो गया, लेकिन आज तक छाई उठाव शुरू नहीं हो सका है। डीवीसी प्रबंधन स्थानीय प्रशासन (बेरमो अनुमंडल एवं बोकारो जिला प्रशासन) से सहायता न मिलने के कारण खुद को हतोत्साहित महसूस कर रहा है। सवाल यह है कि क्या झारखंड अब ‘अंधकार युग’ का सामना करेगा और इस महासंकट का समाधान कब निकलेगा?
- Varnan Live Exclusive





Leave a Reply