संस्कृत बिना अच्छे संस्कारों की कल्पना भी बेमानी : स्वामिनी संयुक्तानंद

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बोकारो।  स्थानीय चिन्मय विद्यालय, जनवृत-5, बोकारो के सभागार में राष्ट्रीय संस्कृत प्रसार परिषद तथा संस्कृतभारती, बोकारो के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को समूहभाव नृत्य, एकलभाव नृत्य, समूहगान तथा एकलगान प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि चिन्मय मिशन, बोकारो की आचार्य स्वामिनी संयुक्तानंद सरस्वती ने दीप प्रज्वलन से किया। विशिष्ट अतिथि के रूप में पूर्व अधिशासी निदेशक रामाधार झा थे। अपने संबोधन में स्वामिनीजी ने संस्कृत भाषा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए संस्कृत भाषा को भारतीय संस्कृति का मूल बताया। कहा कि यह भाषा भारत की प्राण-भाषा है। अध्यात्मदर्शन, ज्ञान- विज्ञान का यह स्रोत है। इसके बिना भारतीय संस्कृति एवं अच्छे संस्कारों की कल्पना नहीं की जा सकती। उक्त प्रतियोगिता में 250 प्रतिभागियों ने भाग लिया। बच्चों ने गीत व नृत्य से अपनी प्रतिभा का कुशल परिचय दिया।

इस अवसर पर मेजबान स्कूल के सचिव महेश त्रिपाठी, कोषाध्यक्ष राजेन्द्र नारायण मल्लिक, प्राचार्य प्रभारी अशोक कुमार झा तथा विभिन्न विद्यालयों के शिक्षक, अभिभावक उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन डा. विनय कुमार पाण्डेय एवं डा. रणजीत कुमार झा तथा स्वागत भाषण संस्कृत भारती के मंत्री रामवचन सिंह तथा धन्यवाद ज्ञापन सचिव शशिकांत पाण्डेय ने किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में डा. आत्मा नन्द सिंह, उदित कुमार पाण्डेय, जयप्रकाश सिंह, हरि पाण्डेय, डा. रामनारायण सिंह, बबीता झा, मीरा शर्मा, माला झा, डा. सुनीता आदि का भरपूर योगदान रहा। गीत प्रतियोगिता की निर्णायक मंडली में डा. आशा रानी, जगदीश बाबला, विश्वकान्त पाठक तथा नृत्य स्पर्धा के लिय नर्मदेश्वर झा, राकेश तथा रामनारायण सिंह की अहम भूमिका रही।

 

  • Varnan Live Report.

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