जन्नत में जैश की ना’पाक’ साजिश, दहशत में अलगाववादी व सत्तालोलुप परिवार

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photo courtesy : google images

नीरज कुमार झा
नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपना वादा पूरा करने को बेताब हैं। उनके भरोसेमंद गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल मोदी के उस वादे को पूरा करने के लिए लगातार सक्रिय हैं, जो भारतीय जनता पार्टी ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में जारी किया था। मामला धरती पर जन्नत (स्वर्ग) का दर्जा पा चुके कश्मीर को जहन्नुम (नरक) से निजात दिलाने का है। केन्द्र सरकार जम्मू-कश्मीर की वादियों को फिर से गुलजार करना चाहती है, लेकिन वहां आजादी के बाद से ही ‘राज’ करने वाला अब्दुल्ला परिवार और भारत सरकार के गृह मंत्री रहते पाकिस्तानी आतंकवादियों को भारत की जेलों से पाकिस्तान की धरती पर सही सलामत पहुंचाने वाले मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी महबूबा मुफ्ती, जिन्होंने हाल के दिनों तक भाजपा के सहयोग से जम्मू-कश्मीर पर राज किया, कश्मीर को जहन्नुम बनाये रखने पर ही आमादा हैं। हिमालय की वादियों में बसे बाबा अमरनाथ का दर्शन करने हजारों की संख्या में हिन्दू धर्मावलंबी अमरनाथ यात्रा की कतार में थे, तभी दिल्ली से अमरनाथ यात्रा को रोकने का फरमान आया। केन्द्र सरकार के एडवाइजरी जारी की कि अमरनाथ यात्रियों को वापस भेजा जाय। जम्मू-कश्मीर में हजारों को संख्या में सेना व पारा मिलिट्री फोर्स के अतिरिक्त जवानों को तैनात किया गया। कारण यह था कि जन्नत कहे जाने वाले कश्मीर में पाकिस्तानी सेना आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सहारे कोहराम मचाना चाहती थी।
पाकिस्तान की ओर से सेना की वर्दी में भेजे गये कई आतंकवादी ढ़ेर कर दिये गये, अमरनाथ यात्रा के रास्ते से भारी मात्रा में पाकिस्तानी सेना के स्नाइपर राइफल समेत कई हथियार व गोला-बारूद बरामद किये गये। पाकिस्तानी आतंकवादी अमरनाथ यात्रियों के खून से घाटी की वादियां लहूलुहान करना चाहते थे। पर, भारतीय सेना ने पाक की ना‘पाक’ साजिश नाकाम कर दी। दुर्भाग्यपूर्ण बात यह कि इन नेताओं ने पाकिस्तान या आतंकवादियों पर अपना मुंह खोलना मुनासिब नहीं समझा, पर सेना की तैनाती से इनकी नींद उड़ गयी। जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी और सत्तालोलुप परिवार के लोग एकजुट हो गये। इन्होंने लोगों के बीच दहशत का माहौल बनाना शुरू कर दिया। जबकि सच्चाई यह है कि दहशत में जम्मू-कश्मीर के आम-अवाम नहीं, बल्कि ये सत्तालोलुप परिवार हैं। उन्हें डर सताने लगा है। डर इस बात का कि मोदी सरकार जम्मू-कश्मीर से धारा- 35 ए को समाप्त कर देगी। दरअसल, यह परिवार जम्मू-कश्मीर को अपनी जागीर समझता है। वर्ष 1990 के दशक में वहां पाकिस्तान की शह पर लाखों हिन्दू परिवारों का कत्लेआम किया गया, लेकिन इन सबकी जुबान पर ताले लटके रहे। इन्होंने कभी नहीं सोचा कि इन्सानियत का खून बहाने की इजाजत कोई भी मजहब नहीं देता। पर, इनका सिर्फ एक ही मकसद रहा कि किसी तरह सत्ता के सिंहासन पर इनका आधिपत्य बना रहे। ये जम्मू-कश्मीर की जनता को बरगलाते रहे और यही सिलसिला आज भी जारी है।

वादियों में बड़े प्लान की चर्चा
कश्मीर की वादियों में इन दिनों यही चर्चा है कि मोदी सरकार का कुछ बड़ा प्लान है और इन फिजाओं में कुछ बड़ा होने वाला है। अमरनाथ जाने के रास्ते में स्नाइपर राइफल व गोला-बारूद की बरामदगी के बाद यात्रियों को बीच में ही वापस लौट जाने की एडवाइजरी, सरकार व सेना का सख्त रुख तथा लगभग आधा दर्जन आतंकियों को घुसकर मार गिराने की कार्रवाई ने कश्मीर में अटकलबाजियों को तेज कर दिया है। जम्मू-कश्मीर के केरन सेक्टर में पाकिस्तानी की बॉर्डर एक्शन टीम की ओर से की जा रही घुसपैठ की साजिश को भारतीय सेना ने नाकाम कर दिया तथा इस कार्रवाई में पांच से सात आतंकी मारे गये। मरने वालों में पाक सैनिकों के भी शामिल होने की संभावना जतायी जा रही है। यही सब वजह है कि पिछले कुछ दिनों से कश्मीर में बैचेनी है। यह बेचैनी घाटी तक सीमित नहीं है। इसके दायरे में दिल्ली का राजनीतिक गलियारा भी है।

अमरनाथ यात्रा रोकने के फैसले के बाद से ‘लगता है, कुछ बड़ा होने वाला है कश्मीर में…’ वाली बात फिजाओं में है। 35ए पर अभी नहीं, तो कभी नहीं? धारा 35ए पर मोदी सरकार को लगता है कि यह सबसे मुफीद वक्त है जब वह कड़ा स्टैंड दिखा सकती है।

अगले हफ्ते एक याचिका पर सुनवाई हो सकती है, जिसमें इस धारा की वैधता पर सवाल उठाए गए हैं। सरकार सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए कह सकती है कि उसे इस धारा को हटाने से आपत्ति नहीं है। यह धारा 370 के मूल अवधारणा में नहीं थी। मालूम हो कि धारा 35ए के तहत जम्मू-कश्मीर में वहां के मूल निवासी के अलावा देश के किसी दूसरे हिस्से का नागरिक कोई संपत्ति नहीं खरीद सकता। इससे वह वहां का नागरिक भी नहीं बन सकता है। 1954 में इस धारा को धारा 370 के तहत दिए गए अधिकारों के तहत ही जोड़ा गया था।

  • Varnan Live Report.

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