आजादी – हमारे पुरखों की हमें अनुपम भेंट

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image courtesy : goofgle images
  • घनश्याम झा
    सदियों की गुलामी के बाद 15 अगस्त सन् 1947 के दिन भारत देश आजाद हुआ। पहले हम अंग्रेजों के गुलाम थे। उनके बढ़ते हुए अत्याचारों से सारे भारतवासी त्रस्त हो गए और तब विद्रोह की ज्वाला भड़की और देश के अनेक वीरों ने प्राणों की बाजी लगाई, गोलियां खाईं और अंतत: आजादी पाकर ही चैन लिया। आज हम खुले वातावरण में चैन की सांस ले रहे हैं। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर कुछ भी बोल रहे हंै, कहीं भी जा रहे हैं। लेकिन, जब आजादी की कहानियां पढ़ते हैं तो रोम-रोम सिहर जाता है। कैसे एक नौजवान भगत सिंह ने हमारी स्वतंत्रता के लिए हंसते-हंसते फांसी के फंदों को चूम लिया होगा। अंग्रेजों ने लाला लाजपत राय की हत्या लाठियों से पीट-पीटकर कर दी, लेकिन अंतिम सांस तक वो हार नहीं माने और मरते-मरते अंग्रेजों को यह कहते हुए गए कि ‘मेरे शरीर पर पड़ी एक-एक लाठी ब्रिटिश सरकार के ताबूत में एक-एक कील का काम करेगी।’ सुभाषचन्द्र बोस, खुदीराम बोस, चंद्रशेखर आजाद जैसे कई महापुरुषों के बलिदान, महात्मा गांधी, सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे महापुरुषों के त्याग और उनकी तपस्या ने हमें खुले में जीने की स्वतंत्रता दी है। कुल मिलाकर हमें हमारे पूर्वजों ने लहू से सींचकर हमलोगों को आजादी का लहलहाता पौध दिया। अब हमलोगों का कर्तव्य है कि हम अपनी आजादी के मतलब को समझें। आजादी का मतलब यह कतई नहीं है कि हम राष्ट्र के मसलों पर अपने ही देश का विरोध करें। आजादी का मतलब यह नहीं कि हम जातिगत विद्वेष या धार्मिक विद्वेष फैलाकर अपने ही राष्ट्र को खंड-खंड करने का प्रयास करें।
    यह आजादी हमें मिली है एकता के बूते और कायम भी रह सकती है एकता के बल पर ही। देश में इस वक्त मॉब लिचिंग, धार्मिक उन्माद की घटनाएं जो बढ़ रही हंै, हमें उनसे मुक्ति पाने का उपाय सोचना चाहिए। देश में कुछ ही ऐसे तत्व के लोग है, जो इस आजादी का नाजायज फायदा उठा रही है, क्योंकि मेरा देश 73वां स्वतन्त्रता दिवस मना रहा है, जो एक गौरवपूर्ण क्षण है। इस क्षण को प्राप्त करने के लिए हमारे महापुरुषों ने वर्षों संघर्ष किए। कठोर से कठोर यातनाएं झेलीं, तब जाकर हम आज उन्मुक्त होकर सांसे ले रहे हैं और अपनी जिंदगी अपने मन से जी रहे हंै। तो क्या हमारा फर्ज नहीं है कि हम इन द्वेष को दूर करने का प्रयास करें। असलियत तो यह है कि जो लड़ाई हमारे पूर्वजों ने इसको पाने के लिए किया वो लड़ाई हमें अब इसकी रक्षा के लिए लड़नी है।

आप शांत चित्त से सोचिए, अंग्रेजों से तो हमें आजादी मिल गई है, लेकिन क्या हमें स्वतन्त्रता सही मायने में मिली है? देश अभी भी कई अंग्रेजरूपी समस्याओं का गुलाम है। जैसे- गरीबी, गंदगी, बेरोजगारी, अशिक्षा, भ्रष्टाचार, हत्या, बलात्कार, हिंसा, आतंकवाद, भेदभाव आदि। देश तभी पूर्ण स्वतंत्र हो पाएगा जब हमें इस सबसे मुक्ति मिल जाएगी। हम आपस में लड़ने के बजाय इन बुराइयों, इन समस्याओं से क्यों न लड़े? तो आइए इस स्वतन्त्रता दिवस पर हम संकल्प लेते हैं कि देश को गरीबी, भेदभाव सहित सभी प्रकार के बुराइयों से मुक्त करेंगे और एक ऐसे भारत का निर्माण करें, जिसमें सभी को समान हक एवं सम्मान मिले। देश के अंतिम पायदान पर रहने वाले व्यक्तियों तक विकास एवं जागरुकता की लौ जलायें और उनकी आवाज बुलंद करें। तभी मेरा भारत सही मायनों में अपनी महानता को सिद्ध करेगा तथा आजादीरूपी अपने पुरखों की अनुपम भेंट की सार्थकता सिद्ध होगी।
जय हिंद ,जय भारत।

  • Varnan Live.

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