अब पाकिस्तान को सता रहा POK छिन जाने का डर, भारत के खिलाफ जिहाद की धमकी

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image source- google images.

नीरज कुमार झा
नई दिल्ली :
भारत सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटा देने के बाद पाकिस्तान के साथ-साथ उसके कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के आतंकवादी संगठन भी बौखला गए हैं। खासकर, संसद में गृह मंत्री अमित शाह द्वारा पीओके और सियाचिन को भारत का हिस्सा बताने तथा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा पाकिस्तान के साथ अब सिर्फ पीओके के मुद्दे पर ही बात किये जाने के बयान के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के साथ-साथ उनके कुछ मंत्रियों और विरोधी दल के नेताओं की बेचैनी कुछ ज्यादा ही बढ़ गयी है। पाकिस्तान के हुक्मरानों को अब पाक-अधिकृत पाकिस्तान के छिन जाने का डर सताने लगा है। इसलिए वे कभी भारत के खिलाफ परमाणु हमले तो कभी जिहाद तक करने की धमकी दे रहे हैं। पीओके के मुजफ्फराबाद में शुक्रवार को आतंकी संगठनों का भारत के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का एक वीडियो सामने आया, जिसमें आतंकी भारत के खिलाफ जिहाद शुरू करने की धमकी देते पाये गये। पाकिस्तानी अधिकारी भी आतंकी सरगना सैयद सलाहुद्दीन के संगठन हिजबुल मुजाहिदीन और यूनाइटेड जिहाद काउंसिल (यूजेसी) जैसे आतंकी संगठनों को भारत के खिलाफ बढ़ावा दे रहे हैं। इससे पहले कश्मीर को लेकर दुनिया भर में अपनी बेइज्जती करवा चुके पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने भी आतंकवादियों के सुर में सर मिलाया था और भारत के खिलाफ जिहाद की धमकी दी थी। इमरान के उकसावे के बावजूद मुठ्ठी भर पाकिस्तानी ही सड़कों पर उतरे और उन्होंने भारत को जिहाद की धमकी दी। जबकि दूसरी ओर इमरान की इस अपील का पाकिस्तान में जमकर विरोध हुआ। पाकिस्तानी लोग जबरन काम से रोके जाने को लेकर भी नाराज दिखे। वहां के बुद्धिजीवी वर्ग ने भी इमरान के इस नए प्रोपगेंडा की निंदा की।

हिन्दुत्व को मिटाने की गीदड़-भभकी
मालूम हो कि इमरान खान ने आर्थिक रूप से कंगाल हो चुकी पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था से लोगों का ध्यान हटाने के लिए भारत के खिलाफ लोगों को खुलेआम सड़कों पर उतरने का आह्वान किया था। इसी दौरान पाक-अधिकृत कश्मीर में एक कार्यक्रम के दौरान एक मौलवी ने भारत के खिलाफ खुलेआम जिहाद की धमकी दी। उसने पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष जनरल कमर जावेद बाजवा को भी जिहाद न करने के लिए कोसा। पीओके में हिजबुल सर्मथक खालिद सैफुल्ला और नाइबर अमीर के साथ पूर्व आतंकियो ने भारत के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन में हिस्सा लिया। इस दौरान खालिद सैफुल्ला ने खुलेआम पूरी दुनिया से हिन्दुत्व को मिटा देने की गीदड़भभकी भी दी। मालूम हो कि पाकिस्तान पहले से ही अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद की निगरानी करने वाली संस्था फाइनेंशिल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की ग्रे लिस्ट में था और अब उसे ब्लैक लिस्टेड भी कर दिया गया है। इसके बावजूद पाकिस्तान में सरेआम आतंकवादी संगठन भारत के खिलाफ जहर उगल रहे हैं।

बिलावल भी बिलबिलाया
पाकिस्तान को इन दिनों पीओके खोने की चिंता सता रही है। पाकिस्तान के विपक्षी नेता बिलावल भुट्टो ने वहां के प्रधानमंत्री इमरान खान पर इस बात को लेकर निशाना साधा है। बिलावल ने कहा है कि ‘पहले हमारी कश्मीर पर क्या पॉलिसी थी? पहले पाकिस्तान की पॉलिसी थी कि हम श्रीनगर कैसे लेंगे। अब इमरान खान सरकार इसे लेने में नाकामयाब रही है। जिसकी वजह से अब पाकिस्तान की ये स्थिति हो गई है कि हम मुजफ्फराबाद (पीओके) को कैसे बचाएंगे, ये सोचना पड़ रहा है। अब पीओके पर संकट है।’

पाकिस्तान के कब्जे में कैसे गया पीओके?
यहां हमारे लिए यह जानना जरूरी है कि पाकिस्तान के लिए कश्मीर से भी ज्यादा जरूरी क्यों है पीओके और क्या है भारत के इस हिस्से का पूरा इतिहास? दरअसल, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर को हम पाक-अधिकृत जम्मू-कश्मीर कहते हैं। प्रशासनिक रूप से पाकिस्तान ने इसे दो हिस्सों में बांट रखा है। पाक-अधिकृत कश्मीर में पाकिस्तान ने एक राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री भी बना रखा है। हालांकि यहां के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री पाकिस्तान के हाथों की कठपुतली से ज्यादा कुछ नहीं हैं। भारत विधानसभा चुनाव में यहां 24 सीटें खाली छोड़ता आया है। दरअसल, 1947 में स्वतंत्रता के बाद पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर पर हमला कर दिया था। तब वहां के राजा हरिसिंह ने भारत सरकार से मदद की गुहार लगायी थी। फौजी मदद के बदले भारत ने कश्मीर को भारत का हिस्सा बनाने की शर्त रखी थी। लेकिन कश्मीर में युद्ध के दौरान ही भारत सरकार ने इस मामले को संयुक्त राष्ट्र में उठा दिया था। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र ने यथास्थिति रखने के लिए कहा गया और जम्मू-कश्मीर का काफी बड़ा हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे में चला गया।

  • Varnan Live Report.

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