झारखंड में भाजपा के लिए भारी कश्मकश- सांप भी बच गया और लाठी भी टूट गई

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(photo courtesy - google images)

विशेष संवाददाता
रांची :
हरियाणा और महाराष्ट्र में वोटों की गिनती के बाद भाजपा में राजनीतिक उठा-पटक देखने को मिला, लेकिन झारखंड विधानसभा चुनाव से पहले ही भाजपा की चुनावी रणनीति फेल होती नजर आ रही है और गठबंधन टूटने से अलग-थलग पड़ी भाजपा के लिए काफी कश्मकश की स्थिति दिख रही है। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने पार्टी के कई शुभचिंतकों की बात को तरजीह ना देते हुए, खुद फैसला लिया। नतीजतन, सांप तो बचा ही और लाठी भी टूट गयी। जिस तरह से भाजपा और आजसू के गठबंधन के हालात हैं, उससे साफ तौर से कहा जा सकता है कि पार्टी न ही गठबंधन बचा सकी और न ही बागी उम्मीदवारों को रोकने में कामयाब हो सकी। कहीं न कहीं भाजपा के बागी नेता ही पार्टी के लिए आगे चलकर चुनौती बनने वाले हैं। जबकि आजसू के मुखिया सुदेश महतो साफ तौर से गठबंधन नहीं बनने का ठीकरा भाजपा पर फोड़ चुके हैं। उनका आरोप है कि भाजपा ने आजसू के प्रस्ताव को दरकिनार किया, इसलिए उन्होंने भी अपने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर दी। सुदेश ने भाजपा पर आरोप लगाया कि ‘यह कैसा गठबंधन है, जिसमें सीट शेयरिंग पर बात बनी नहीं और पार्टी लिस्ट जारी कर देती है?’

गठबंधन की रणनीति भी फेल
भाजपा, आजसू और लोजपा यानी जिस एनडीए के गठबंधन की बात पार्टी कर रही थी, वह भी फेल रहा। लोजपा ने राज्य में अपने करीब 50 उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। लाख कोशिशों के बाद भी सुदेश भाजपा से अलग हो गये। आजसू जहां एनडीए की मुख्य पार्टी मानी जा रही थी, उसी ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुआ के खिलाफ चक्रधरपुर में अपना उम्मीदवार उतार दिया। इधर, चंदनकियारी में भाजपा के मंत्री अमर बाउरी के सामने भी आजसू की तरफ से उमाकांत रजक मैदान में उतर चुके हैं। चुनाव से लगभग एक-डेढ़ माह पहले ही सुदेश इसे साफ कर चुके थे और खुद उमाकांत ने भी घोषणा कर रखी थी।

– Varnan Live Report.

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